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अभिव्यक्ति की मासिक गोष्ठी में हर्षित के काव्य संग्रह कलर्स अमिडस्ट शैडोज का विमोचन

Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 2 November:
अभिव्यक्ति की मासिक गोष्ठी में हर्षित के काव्य संग्रह कलर्स अमिडस्ट शैडोज का विमोचन
फिजिक्स की पढ़ाई करने वाले हर्षित के पहले काव्य संग्रह कलर्स अमिडस्ट शैडोज़ का विमोचन अभिव्यक्ति की मासिक गोष्ठी के पहले सत्र में  सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी और सृष्टि प्रकाशन के सहयोग से हुआ। इसका संयोजन और संचालन साहित्यकार और रंगकर्मी विजय कपूर ने किया। सृष्टि प्रकाशन द्वारा छपी इस पुस्तक में 49 कविताएं हैं। हर्षित ने अपने संग्रह के बारे में कहा “कलर्स अमिड्ट शैडोज़ कविता की कला के माध्यम से अक्सर अनदेखी की गई भावनाओं का एक आत्मनिरीक्षण अन्वेषण प्रदान करता है।”
विजय कपूर ने अपनी समालोचना में कहा ”  ये हर्षित के अनुभव हैं जो काव्यात्मक अभिव्यक्ति में परिवर्तित हुए। भावनाओं और जुनून से बुनी हुई इन कविताओं से उठते विरोधाभास ने इन्हें सत्य के और क़रीब ला दिया है। साहित्य के इस सबसे भावनात्मक रूप में उद्यम करना साहसपूर्ण है। इन कविताओं में वेदना बोध की अभिव्यक्ति मुखर होती है। दृश्य सौंदर्य चेतना में बखूबी दिखते हैं। अपने समय के विघटित यथार्थ को चित्रित करती हैं ये रचनाएं, जिनमें इनकी रचनाधर्मिता का बोध भी इंगित होता है।”
अलका कांसरा ने अपनी टिप्पणी में कहा ” प्रेम, हर्ष, दुःख और हानि की कविता जिसके माध्यम से कवि किसी चीज़ की तलाश में लगता है। हो सकता है कि वह अपने आप की खोज में हो, प्रकृति के साथ अपने रिश्ते की, सर्वशक्तिमान के साथ अपने रिश्ते की, हो सकता है कि उसकी अपनी भावनाएं अंधेरी परछाइयों के बीच रंग ढूंढ रही हों।” अन्नू रानी शर्मा ने कहा ” कलर्स अमिड्ट शैडोज़’ कविताओं का एक सम्मोहक संग्रह है जो एक युवा कवि की उत्कृष्ट शिल्प कौशल और गहरी भावनात्मक जटिलता के साथ प्रतिध्वनित होने वाले भावों को उकेरने की उनकी परिष्कृत क्षमता को प्रदर्शित करता है। पहचान, अपनेपन, कला की उपचार शक्ति और हानि के लंबे समय तक रहने वाले दर्द के विषयों के साथ, यह पुस्तक पाठकों को उनके भावनात्मक ज्वार से जोड़ती है।”
डॉक्टर सुनीत मदान ने अपने उद्गार यूं व्यक्त किए “कलर्स अमिडस्ट शैडोज,युवा कवि के अनुभवों के विषयों, भावनाओं, कल्पना और प्रतिबिंबों का एक समृद्ध काव्य संग्रह है।”  दूसरे सत्र में ट्राइसिटी के जाने माने साहित्यकारों ने उम्दा कविताओं और कहानियों से सुनने वालों को सराबोर कर दिया। इस दौरान अमरजीत अमर ने “बड़े क़रीब से गुज़रा है ज़लज़ला यारो हमारी रूह तक को भी हिला गया यारो।”
विजय कपूर ने “विडंबनाओं की अपनी बेचैनियां हैं/ तराशना पड़ता है विरुद्ध रहकर साथ रहने का हुनर।” मिकी पासी ने जब पुराने विद्यालय के सामने से गुजरा… पुराने दिन याद आये… डॉक्टर अर्चना आर सिंह ने “बातें खत्म हो जाती हैं सन्नाटे पसर जाते हैं, धड़कनें भी मध्यम हो जातीं हैं जब बातें खत्म हो जाती हैं।”
सतिंदर गिल ने ‘अधूरी बात छोड़कर अपना मुख मोड़कर’ रजनी पाठक ने काहवे का स्वाद चाय के चस्के से ख़ुद को बेहतर बता रहा
वादी की दास्तान झील का मंजर बता रहा। डॉक्टर सत्यभामा ने  पराश्रित और  बेवफा, डॉक्टर विमल कालिया ने जाने क्यों  तुम्हारी हंसी
आ टपकती है..दबे पांव। डॉक्टर नवीन गुप्ता ने  मुहब्बत जो करो तो बस इतनी शिद्दत से करो कल तुम्हें ये ना लगे यूं  किया होता तो यूं  होता
डॉक्टर निर्मल सूद ने मैंने पहाड़ को रोते  देखा है, सुनी हैं उसकी सिसकियाँ… कृष्ण गोयल ने ना किताबें बोल पाती हैं, ना लफ़्ज़ों की जुबां खुले
मेरे दर्द के दो ही गवाह थे दोनों  बेजुबां निकले !!
शहला जावेद ने ख़्वाबों के परिंदे जब उड़ते हैं कहाँ- कहाँ घूम,ठहर आते  हैं वक़्त को जैसे थाम लेते हैं बीते लम्हें जैसे फिर सांस लेते हैं।
राजिंदर सराओ ने ना पपीहा कोई हूक उठाए ना कोयल कोई गीत सुनाए। ना खुद से किसी की बातें करना। ना सिली सिली रातों का जलना। अश्वनी भीम ने आओ मोमबत्ती जलाएं क्रांति के नारे लगाएं प्रेम और भक्ति के गीत गाएं मस्ती में झूम जाएं। डॉक्टर प्रसून प्रसाद ने किताबें
आपसे बातें करती हैं केवल बतियाती  ही नहीं कुछ अच्छी किताबें आपकी बातें सुनतीं भी हैं। डॉक्टर सुनीत मदान ने क्या लिखे शब्दों में अनलिखे की कोई रम्ज़ पकड़ पाएगा? क्या पात्र में पड़ा अनभेजा पत्र कभी अपने पते तक पहुँच पाएगा? बी बी शर्मा ने गम किसी का बाँट कर
मुझ में कुछ घटा नहीं।  आर के सुखन ने वो दीवाली अब नहीं आती अब वो ईद भी नहीं आती जैसी आती थी कभी बचपन में  अब वो नींद भी नहीं आती। अलका कांसरा ने जीवन है उमंग है प्यार है मिलन है आओ ज़िंदगी का जश्न मनाएं। अन्नू रानी शर्मा ने तू सुबह तक दीप्त रहना एक तारे की तरह सारिका धूपड़ ने अनंत काल तक आशीष पाने को अपने आँगन का वृक्ष बनाना मुझे तुम।” जैसी रचनाओं का सारगर्भित पाठ किया।
सुभाष शर्मा ने व्यंग्य ” छेदी लाल ” से गुदगुदाया। डॉक्टर पंकज मालवीय ने संजीदा कहानी “वरिष्ठ नागरिक” पढ़ी। डॉक्टर सपना मल्होत्रा ने सुंदर  कहानी “रंगीली”का पाठ किया, डॉक्टर विमल कालिया ने कहानी “आठ का दूसरा शून्य”  को बड़े दिलचस्प ढंग से सुनाया। रेखा मित्तल ने अपनी लघु कहानी को सुनाया। अश्वनी भीम ने उम्दा व्यंग्य “घर में प्रजातंत्र” सुनाया। इस दौरान लाइब्रेरियन डॉक्टर नीज़ा सिंह, प्रिंसिपल इंदौर सिंह रंगा, हिमांशी,अजय सिंगला, प्रकाशक विजय सोदाई, चमन लाल चमन और ख़ुशनूर भी उपस्थित रहे।

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