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“कर्ण” नाम के खंड काव्य का आखरी अध्याय पढ़ा गया

Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 2 November:
“कर्ण” नाम के खंड काव्य का आखरी अध्याय पढ़ा गया
साहित्य विचार मंच की अक्टूबर माह की गोष्ठी उत्तम रेस्टोरेंट सेक्टर 46 में आयोजित हुई जिसमें वरिष्ठ कवियों और कहानिकारों ने ने भाग लिया । कार्यक्रम का संचालन अमरजीत अमर ने किया । कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने अपनी ग़ज़ल से यूं की “बे करीब से गुजरा है जलजला यारो/ हमारी रूह तक को भी हिला गया यारो।”
बृज भूषण शर्मा ने अपनी ग़ज़ल “मालिक है मेहमान नहीं है/बुजुर्ग पुराना सामना नहीं है” को पढ़ा। विजय कपूर ने अपनी कविता पढ़ते हुए कहा “अजगर की तरह लोटना लिपटना सीख लो/ अगर दांतों से काम नहीं लेते हो।” सरदारी लाल धवन कमल ने अपनी ग़ज़ल में कहा “हुस्नों शबाब ओ ज़र में तुझे क्यों गुखर है/कुछ रोज़ की बहार है क्यों मद में चोर है!” सुभाष शर्मा ने अपने अप्रकाशित खंड काव्य “कर्ण” के अंतिम अध्याय का बहुत सुंदर पाठ किया। सभी रचनाओं को खूब सराहा गया। इस दौरान सभी रचनाओं पर सकारात्मक बहस भी हुई।

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