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चंडीगढ़ साहित्य अकादमी का पहला त्रिभाषिय कहानी दरबार आयोजित हुआ

चंडीगढ़ साहित्य अकादमी का पहला त्रिभाषिय कहानी दरबार आयोजित हुआ
हिंदी, पंजाबी और उर्दू के जाने माने कहानिकारों ने शिरकत की
चंडीगढ़ अकादमी के अध्यक्ष और केंद्रीय अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने अध्यक्षता की
अकादमी के उपाध्यक्ष मनमोहन सिंह ने सभी का स्वागत किया
कहानीकार बल्लिजीत, विजय कपूर, सुभाष शर्मा, डॉक्टर राजिंदर कनौजिया, रेनू बहल ने कहानी पढ़ी-सुभाष भास्कर
Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 23 July:
चंडीगढ़ साहित्य अकादमी का पहला त्रिभाषिय कहानी दरबार 23 जुलाई को पीपल्स कन्वेंशन हाल सेक्टर 36 में आयोजित हुआ, जिसमें हिंदी, पंजाबी और उर्दू के जाने माने कहानिकार बल्लिजीत, विजय कपूर, सुभाष शर्मा, डॉक्टर राजिंदर कनौजिया, रेनू बहल ने शिरकत की। इसकी अध्यक्षता चंडीगढ़ अकादमी के अध्यक्ष और केंद्रीय अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने की। अकादमी के उपाध्यक्ष मनमोहन सिंह ने सभी का स्वागत किया।
कहानीकार बल्लिजीत ने अपनी कहानी मौत दी उड़ीक विच में एक मां का बच्चों से प्रेम और बच्चों का मां के प्रति नकारात्मक रवैया तथा अंततः संबंधों के पलायन के साथ ही मां की मौत का इंतजार बहुत मार्किक ढंग से दर्शाया गया है। बहुत सटीक ढंग से रेखांकित किए गए हैं टूटते रिश्ते।
साहित्यकार और रंगकर्मी विजय कपूर ने फिर से नाम की कहानी में उपलब्धियों के पीछे भागते हुए जीवन में छूटते मासूम एहसाओं को एक डॉक्टर अरुणिमा और आशु नाम के दंपति के जरिए दिखाया। अनुनिमा एक स्त्री रोग विशेषज्ञ है और पीड़ा रहित प्रसव की शोध में व्यस्त रहते हुए स्वयं प्रसव  पीड़ा से डरती है। चौदह वर्ष की रिसर्च के बाद जब वो रिसर्च में कामयाब हो जाती हो तो बच्चा पैदा करने की उमर चली जाती है।अनेक मोड़ों से गुजरती यह कहानी एक सशक्त प्रेम कहानी है। कथानक का मानस पर मनोविज्ञानिक दस्तक देती है यह कहानी।
डॉक्टर राजिंदर कनौजिया की कहानी लावारिस चेहरे गरीब अवाम और उनकी आकांक्षाओं को गांधी के बुत और तीन बंदरों के ज़रिए  दिखाया गया है। इसमें देश के हालत को देखकर 1 अक्तूबर को गांधी के सब बुत गायब हो जाते हैं। इल्जाम मंगरू पर आता है। क्योंकि वही रोज़ बुत की सफाई करता है। उसकी गुहार पर गांधी अपनी जगह पर लौट आते हैं। नेता 2 अक्तूबर को गांधी जी हार पहनाते है। दूर खड़े मंगरू को लगता है कि गांधी जी कह रहे हैं कि तू अब जा यह सब नेता भी अब अगले बरस आएंगे फूल मालाएं चढ़ाने। सत्य के मूल को अनुभूति करती है यह कहानी।
कहानीकार और कवि सुभाष शर्मा ने अपनी कहानी सीटी वाला बाबू पढ़ी। यह कहानी एक दलित की कहानी है जो रेलवे में चौथे दर्जे की नौकरी करता है पर सपना देखता है कि किसी दिन उसका बेटा स्टेशन मास्टर बनेगा। स्टेशन मास्टर बनने के सफर की एक सशक्त कहानी है। चर्म विश्वास से प्राप्ति की कहानी है।
अंतिम कहानी उर्दू में रेनू बहल द्वारा लिखित कहानी मगर हकीकत है थी। एक मां पारिवारिक समस्याओं से जूझते हुए एक दिन ओल्ड एज होम में अपने लिए एक पार्टनर ढूंढ लेती है और घर से पलायन करती है कि उसका जीवन अभी समाप्त नहीं हुआ वो जैसे चाहेगी करेगी। जीवन चिंतन के अंतिम पड़ाव की कहानी है।
अकादमी में अध्यक्ष माधव कौशिक ने अपने वक्तव्य में कहा “विभिन्न रंगों की पांचों कहानियां सारे भारत का चिंतन समेटे हुए हैं। इन कहानियों में कहानी की नवीन विधा दस्तक देती है। चंडीगढ़ के कहानीकार राष्ट्रीय परिप्रेक्ष में सीना तान कर खड़े हैं।” कार्यक्रम का सफल संचालन अकादमी के सेक्रेटरी सुभाष भास्कर ने सफलता से किया।  इस कार्यक्रम में जाने माने साहित्यकार  परमजीत परम, डॉक्टर कैलाश आहलूवालिया, मंजू जैदका, सुरजीत सुमन, जगदीप सिद्धू, रेखा मित्तल, सुनीत मदान, निशांक,बलजीत, डॉक्टर सत्यभामा, डॉक्टर शांडिल्य, अजय राणा आदि शामिल रहे।

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