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डॉ कर्म चंद की नवीन गद्य पुस्तक “वासुधैव कुटुंबकम्” विमोचन आयोजित किया – विजय कपूर

Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 10 December:
अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था ने सृष्टि प्रकाशन और सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के सहयोग से डॉ कर्म चंद की नवीन गद्य पुस्तक “वासुधैव कुटुंबकम्” विमोचन आयोजित किया। “वासुधैव कुटुंबकम्” की भावना को दर्शाती डॉ कर्म चंद की इसी नाम की गद्य पुस्तक का भव्य विमोचन अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था द्वारा सृष्टि प्रकाशन और सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के सहयोग से उनकी सभागार में साहित्यकार और रंगकर्मी विजय कपूर के संयोजन और संचालन में हुआ। यह पुस्तक सार्वभौमिक भाईचारे और एकता के शाश्वत भारतीय दर्शन ‘वासुदेव कुटुंबकम्’ (समस्त विश्व एक परिवार है) पर आधारित  विचारोत्तेजक गद्य पुस्तक है।  पुस्तक का विमोचन कार्यक्रम की अध्यक्षा डॉ निर्मल सूद, विशेष अतिथि  ब्रह्म जगदीश, डॉ गुण निधि, विजय कपूर, डॉ विमल कालिया विमल और डॉ विनोद कुमार द्वारा किया गया, जो इस दर्शन के प्रबल समर्थक हैं। ​
लेखक डॉ कर्म चंद ने अपनी पुस्तक पर कहा “मुझे इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा हमारे दर्शन की उदार और समावेशी दृष्टि से मिली। मुझे विश्वास है कि मेरा यह प्रयास भारत की अनेकता में एकता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भावना को साहित्यिक बल प्रदान करेगा” अध्यक्षा डॉ निर्मल सूद ने कहा “पुस्तक से उदार मापदंड का चरित्र झलकता है। ​संकीर्ण सोच वाले लोग ही ‘मेरा और पराया’ गिनते हैं, जबकि उदार हृदय वालों के लिए तो संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है।” विशेष अतिथि ब्रह्म जगदीश का कहना था “​वैश्विक भाईचारे का आह्वान करती है यह पुस्तक। यह सिद्धांत राष्ट्र, जाति, धर्म या भौगोलिक सीमाओं से परे है।” विजय कपूर का कहना था “यह पुस्तक आधुनिक युग में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और विश्व शांति के लिए एक मजबूत साहित्यिक आधार प्रस्तुत करती है।” ​डॉ विमल कालिया विमल ने अपने वक्तव्य में कहा “इस पुस्तक का दर्शन  सभी के प्रति दया, करुणा और सम्मान के साथ व्यवहार करना सिखाता है।” डॉ गुण निधि ने इस पुस्तक के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा “यह अहिंसा और समानता के सिद्धांतों को मजबूत करती है।” डॉ विनोद कुमार ने कहा “इस पुस्तक का विषय आत्म-केंद्रित और संकीर्ण विचारधाराओं का जबरदस्त खंडन करता है।” इस कार्यक्रम में सुरिंदर पाल सोनी, राजेश बेनीवाल, राजिंदर सराओ और प्रभुनाथ ने कविता पाठ में भाग लिया।

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