Chandigarh (Sursaanjh.com bureau), 24 September:
बेगम इकबाल बानो फाउंडेशन का छटा लिखत पोएटिका
बेगम इकबाल बानो फाउंडेशन के छटे लिखित पोएटिका का आयोजन 23 सितंबर को सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के सहयोग से उनकी सभागार में हुआ जिसमें ट्राइसिटी के बेहतरीन कवियों/शायरों ने शिरकत की। इस कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार और रंगकर्मी विजय कपूर ने किया जो फाउंडेशन के डायरेक्टर भी हैं।


यह फाउंडेशन बॉलीवुड के मशहूर गीतकार इरशाद कामिल की मां की याद में बनाई गई है। इसका उद्देश्य युवाओं के भारतीय परंपराओं, संस्कृति और कला से जोड़ना है। शिक्षा और महिला सशक्तिकरण में भी इस फाउंडेशन की बड़ी भागीदारी है। कार्यक्रम में राजेश बेनीवाल ने मेरे तजस्सुस को बढ़ा दिया उसने जाने क्या लिख के मिटा दिया उसने, पाल अजनबी ने इतना दम नहीं है अंधेरों में देख लेना/ रौशनी को देख कर ही ये सिमट जाएंगे।
डॉक्टर अवतार सिंह पतंग ने हंसता खेलता, खाता पीता सेहतमंद आदमी भी/ कई बार जीवित नहीं होता, अंजली बंगा अज नई मनदा
कल नई मनदा मेरी इक बी गल नही मनदा,राजवंती मान ने शब्दों में इतनी सी धार हो कि लिख सकें एक गीत मन भाया सा पीठ पीछे न हो कोई साया गहराया सा,बलकार सब तरा दियां प्राप्तियां /समूची जिंदगी यानी सब कुज वार देन दी समर्था है। विजय कपूर ने इतना मुश्किल मैंने कोई वादा नहीं किया था, तुम्हारे न होने पर भी खुद को आधा नहीं किया था।
रविंद्र टंडन ने ईरान के बुनकरों पर अंग्रेजी में उत्तम रचना, राजन तेजी ने इक तो मेरा जो यार है पर्दा-नशीन है लेकिन छुपा है जिस में वो पर्दा महीन है, डॉक्टर अनीश गर्ग ने कोई खास अकेला तो नहीं हूं मैं, घर से निकलता हूं तो चाबियां मेरे साथ चलती हैं, वापस लौटने पर चाबियां लटक जाती हैं, नीलम त्रिखा ने प्यार में उनके इस कदर दीवाने हो गए, सारी दुनिया से जैसे हम बेगाने हो गए, राशि श्रीवास्तव ने गर चाहते हैं आपकी खुशी में सब हों खुश खुद औरों की ख़ुशी से फ़िर जला ना कीजिए।
प्रिशा शर्मा ने अंग्रेजी में देशभक्ति में रंगी सुंदर कविता, अजहर भट्ट ने उसने लाचार कर के छोड़ा है मुझ को संग-सार कर के छोड़ा है।
विशेष अतिथि डॉक्टर राजवंती मान ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन कविता को कभी मरने नहीं देंगे। कार्यक्रम के अध्यक्ष बलकार सिद्धू ने अनेक भाषाओं में हुए इस कवि सम्मेलन को भाषा की सीमाओं को मिटाने का खूबसूरत प्रयास बताया जिसमें प्रतिभागी कामयाब रहे अपनी सारगर्भित रचनाओं के साथ। बबिता कपूर ने इतना विचारो मत छोड़ दो उतार दो उसे जो चढ़ता है तुम्हारे कांधों के सहारे
और जा बैठता है तुम्हारे सर पर। सीमा गुप्ता ने मेरे लिए जीवन नहीं मृत्यु विराट है, मौलिक है।
कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार डॉक्टर कैलाश आहलूवालिया, डॉक्टर निर्मल सूद, रेखा वर्मा, जी एस मावी, डॉक्टर नवीन गुप्ता, डॉक्टर प्रसून प्रसाद, डॉक्टर तृप्त, सुमन लता रावत, अन्नुरानी शर्मा, सुरिंदर सोईन, शालू सेहरावत तथा पिंकी उपस्थित रहे।

