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बेगम इक़बाल बानो फाउंडेशन के “लिखत पोएटिका” कवि सम्मेलन का आठवां संस्करण

Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 21 November:
बेगम इक़बाल बानो फाउंडेशन के “लिखत पोएटिका” कवि सम्मेलन का आठवां संस्करण
किस्से झूठे, कहानी अधूरी, यादें पैनी देकर गए, सुकून चाहा था तुमसे और तुम बेचैनी देकर गए
बेगम इक़बाल बानो फाउंडेशन के “लिखत पोएटिका” कवि सम्मेलन का आठवां संस्करण सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के सहयोग से उनकी सभागार में 20 नवंबर को आयोजित किया गया। बॉलीवुड में चर्चित गीतकार इरशाद कामिल की मां की याद में गठित इस फाउंडेशन के डायरेक्टर विजय कपूर ने बताया कि इस फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी संस्कृति और कला से जोड़ना है। कार्यक्रम का संचालन अभिनेत्री, साहित्यकार, रंगकर्मी बबिता कपूर ने किया जो बेगम इकबाल बानो फाउंडेशन की सदस्या भी हैं। इस कार्यक्रम में 15 जाने माने युवा और स्थापित रचनाकारों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में हिंदी, अंग्रेज़ी, उर्दू, पंजाबी, बांग्ला और उर्दू में कलाम पढ़े गए।
काजल कौशिक ने “किस्से झूठे कहानी अधूरी यादे पैनी देकर गए सुकून चाहा था तुमसे और तुम बेचैनी देकर गए”, रचित ने “जे मेरी मां हुंदी/ओ मेरे चंगे माड़े कम्मां ते पर्दा कज्ज लैंदी”, आभा मुकेश साहनी ने “क्या ज़माना था जब कबूतर पैग़ाम लाता था
कभी ख़ुशी तो कभी ग़म का खत पहुँचाता था”, आयुष ने “खुदसे सवाल है के कहां मिलूंगा मैं इतने लोगों से मिल चुका हूं शायद तन्हा मिलूंगा मैं” विद्या नंद ने “आखिर कश्ती तट छोड़ चली/सहसा मुख अपना मोड़ चली”, सुरेश कुमार ने “जाने ये क्या मैं कर बैठा/झूठे शखस से सच्चा इश्क कर बैठा”, प्रणव शर्मा ने अंग्रेज़ी कविताएं ओशन और मदर सुनाई, गौतम शर्मा ने “नहीं मौजूद जन्नत में/यहीं पर दोस्त मिलते हैं” डॉ तिलक सेठी ने “इस जहां की भीड़ में,भी  बेख़ुदी हावी रही/ दूर  होकर  शोर  से भी खलबली हावी रही”, महेश्वर ने “मैं बना हूँ समंदरों से और इक शरारे से जल गया था मैं”, राजेश बेनीवाल ने “मत छेड़ मैं हूं ख़ाक़-ए-तमन्ना-ए-ना-मुराद कहीं सुलग ना जाए ये आतिश बुझी हुई” रेखा मित्तल ने “मांँ की महक ढूँढती हूँ मैं तुम्हें तुम्हारी अलमारी में/तुम्हारी साड़ियों में महसूस करती हूँ तुम्हारी महक तुम्हारे आँगन में/तुम्हारे कंगन में”, करीना मदान ने “सोने की चिड़िया भारत – भ्रष्टाचार मुक्त भारत / विकसित भारत का देखा है स्वप्न/भारत हो रहा विकास में मगन/राष्ट्र प्रेम की ज्वाला हृदय रत उत्पन्न  योग करें हम अपना हर पल हर क्षण”, गौरव सोम ने “ये हरियाली में बंजर कैसा है/बेचैन निगाहों में मंजर कैसा है/बाहर से तो बेहतर दिखता है/तेरा ये हाल अंदर कैसा है”।
सभी रचनाकारों ने सारगर्भित काव्य रचनाओं का सुंदर पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉक्टर राजिंदर कौर ने अपने वक्तव्य में कहा ” कला पक्ष और कथ्य की स्वभाविकता के ताल मेल की रचनाओं ने सामयिक उथल पुथल को  खूब निभाया” और उन्होंने अपनी पंजाबी कविता “आ…ज़िंदगी दे पिंडे ‘ते गीत लिखए जागदीआं अक्खां दा नींद दा की ए सौं लांगे…फेर कदे”। कार्यक्रम के गेस्ट ऑफ ऑनर रविंद्र टंडन ने कहा “कविता ध्यान का एक कार्य है, जो एक सूक्ष्म संतुलन प्राप्त करने में मदद करती है, जैसे कि झील पर एक नाव, अदृश्य सहजता से सरकती हुई। मन के बहुरूपदर्शक में असंख्य छवियां रचनात्मक अभिव्यक्ति खोजने के लिए दौड़ रही हैं, एक जटिल भूलभुलैया से बाहर निकलने के लिए अपने स्वयं के तरीके ईजाद कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने पंजाबी और हिंदी में अपनी कविताएं भी सुनाई ” ਮੇਰਾ ਸ਼ੀਸ਼ਾ ਟੁੱਟ ਗਿਆ/ਮੇਰਾ ਸਵੇਰ ਵੇਲੇ ਦਾ ਸਾਥੀ/ਬਿਨਾ ਦੱਸੇ ਪਤਾ ਨਈ ਕਿੱਥੇ ਭੱਜ ਗਿਆ? ਸ਼ਾਇਦ ਲੰਮੀ ਨੀਂਦਰ ਵਿਚ ਲਮਲੇਟ ਹੋਵੇਗਾ ਕਿੱਥੇ ਨਾ ਕਿੱਥੇ/ਅਮਲੀ ਕਿਸੀ ਥਾਨ ਦਾ” और “गए दिनों की यादें टंकी हैं सलमें सितारों की तरह समय की चुनरी में”।
लाइब्रेरियन डॉक्टर नीज़ा सिंह खास तौर पर शामिल हुईं। कार्यक्रम के दौरान अनेक साहित्यकार उपस्थित जिनमें प्रसून प्रसाद, डॉक्टर निर्मल सूद, सुरजीत सुमन, जगदीप सिद्धू, शालू सेहरावत, पिंकी, डॉक्टर दलजीत कौर, निम्मी वशिष्ठ, अन्नुरानी शर्मा, शहला जावेद, सुभाष शर्मा, बबिता सागर, सत्यवती आचार्या, दीक्षित जोशी, सपना, अमरजीत अमर, वीना सेठी आदि उपस्थित रहे।

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