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सावन की फुहारें  दिल को भिगोने लगीं/ सत्यवती आचार्य, चंडीगढ़

सावन की फुहारें  दिल को भिगोने लगीं/ सत्यवती आचार्य, चंडीगढ़
          श्रुति ने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया। वह अमन से प्यार करती थी। अमन भी उस पर जान छिड़कता था। माता-पिता ने उसकी शादी रोहन के साथ तय कर दी थी। यह उनकी दिली तमन्ना थी।
          आज बात रिंग-सेरेमनी तक पहुँच गई थी। रोहन में उसे कोई कमी नज़र नहीं आ रही थी। रोहन ने उसकी आंखों में छिपे बादल को देख लिया।
           “मैं तुम्हें, तुम्हारे प्यार से मिलाऊँगा” उसने बोला। श्रुति की आंखों से सावन की फुहारें, दिल को भिगोने लगीं। रोहन ने उसके माथे को चूम लिया l
सत्यवती आचार्य, चंडीगढ़

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