बढ़े चलो/ सत्यवती आचार्य
Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 29 November: बढ़े चलो/ सत्यवती आचार्य गिर गए हो गर, तो हर्ज़ ही क्या? गिर, गिर उठना आवश्यक है जीवन ही गिरना, उठना है फिर, फिर उठकर तुम बढ़े चलो। विघ्न और बाधाएँ भी हैं संगी-साथी जीवन के धूल-धूसरित कर उन सबको शूरवीर बन डँटे रहो तनिक रुके बिन बढ़े चलो l…