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विख्यात लेखक अर्जुन देव चारण, पूर्व उपाध्यक्ष, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की पुस्तक “पंचम वेद.. नाट्य शास्त्र: नवीन दृष्टि” – प्रोफेसर रवेल सिंह द्वारा अनुवादित पंजाबी संस्करण का विमोचन किया गया

Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 21 November:
आज चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से पीपल कन्वेंशन सेंटर सैक्टर 36 चंडीगढ़ में विख्यात लेखक अर्जुन देव चारण, पूर्व उपाध्यक्ष, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की पुस्तक “पंचम वेद.. नाट्य शास्त्र: नवीन दृष्टि” के प्रोफेसर रवेल सिंह द्वारा अनुवादित पंजाबी संस्करण का विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डा माधव कौशिक, अध्यक्ष राष्ट्रीय साहित्य अकादमी ने की। इस अवसर पर डा मनमोहन सिंह, चेयरमैन, डा अनीश गर्ग वाइस चेयरमैन एवं सचिव सुभाष भास्कर उपस्थित रहे। प्रोफेसर रवेल सिंह ने इस अमूल्य पुस्तक के पंजाबी अनुवाद का अनुभव साझा किया। और बताया कि पंचम वेद के 300 पंजाबी संस्करण आनलाइन बिक चुके हैं। अर्जुन देव चारण ने कहा अपनी पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि हम “नवीन दृष्टि” की बात करते हैं, यानी नाट्यशास्त्र को पारंपरिक नुस्खों के अलावा आधुनिक समय में उसकी उपयोगिता के संदर्भ में देखना चाहिए। हम नाटक को सिर्फ शास्त्रीय मंच के रूप में न देखें, बल्कि उसे समाज में नैतिकता, आध्यात्म और सांस्कृतिक संवाद का जीवंत माध्यम बनाएं।
आज के समय में, जब हम डिजिटल युग में हैं, यही सोच नाट्य को केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि विकासशील समाज के लिए प्रासंगिक उपकरण बनाती है। डा मनमोहन सिंह ने कहा कि अर्जुन देव चारण की “पंचम वेद” हमें याद दिलाती है कि नाट्यशास्त्र और वेद केवल अलग-अलग शास्त्र नहीं हैं, बल्कि वे हमारी सभ्यता के दो पहलू हैं जहाँ ज्ञान, संगीत, अभिनय और भावनाएँ मिलकर जीवन को गहराई से प्रतिबिंबित करती हैं। डा अनीश गर्ग ने कहा कि नाटक न सिर्फ दृश्यता और मनोरंजन है, बल्कि एक ज्ञान-वाहक मंच है, जिसमें वेदों का सार और गूढ़ता आम जन तक पहुंच सकती है। यही कारण है कि नाट्यशास्त्र को “पंचम वेद” कहना सार्थक और मुक्तिदायक सोच है। इस कार्यक्रम में विशेष तौर पर जंग बहादुर गोयल, पूर्व आईएएस, मक्खन मान, प्रेम विज, अलका कांसरा, प्रो राजेश, भूपिंदर सिंह मलिक, प्रो हरमेल, निखिल चंदन, सरदारा सिंह, पाल अजनबी इत्यादि उपस्थित रहे।

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