Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 7 February:
1974 से सक्रिय अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था चंडीगढ़ की फरवरी माह की गोष्ठी 1036, फेज 4, मोहाली में 7 तारीख को 2 बजे दुपहर से शाम 5 बजे तक हुई। इसका संयोजन और संचालन किया साहित्यकार और रंगकर्मी विजय कपूर ने। मेज़बानी रही डॉ.अशोक की रही। इस गोष्ठी में अभिव्यक्ति से जुड़े ट्राइसिटी के ख्याति प्राप्त और युवा साहित्यकारों ने अपनी कविताओं और कहानियों के साथ भाग लिया।


रविंदर टंडन ने क्यों नहीं करती तुम सवाल, इतराती रहती हो बस अनुराग से भरी, विजय कपूर ने तितलियों की मखमली उड़ान के बाद सीने में उभर आते हैं डैने, कोई क्या करे, डॉ प्रसून प्रसाद ने पछुआ को ठेलकर पुरवाई आई, खिल उठी मालती और जूही लहराई, आर के सुखन ने इतने हंसे कि आंख से आंसू निकल पड़े हमको सज़ा मिली थी बहुत मुस्कुराने की, डॉ सपना मल्होत्रा ने जब अपनी ही देह की दोनों भुजाएँ पीठ पीछे हाथ मिला लें, डॉ रोमिका वढेरा ने जब तुम आए थे इस जहाँ में पारस बमोला ने नई बात करते हैं चलो एक नई शुरुआत करते हैं, नए सिरे से फिर मुलाकात करते हैं, अपूर्वा रवि सौंध ने वर्षा, गुलाब, चंदन और तुम एहसासो का एक मेला सा तुम बरसने लगे यूं रूह पे मेरे हिस्सा यूं इस कहानी का तुम, राशि शर्मा रश्मी ने मेरा दिल है अभी बच्चा जो ज़िद में रूठता भी है इस को चांद की चाहत लड़कपन है ख़ता भी है,
परमिंदर सोनी ने आभास एक महक सी हरदम रहती है मेरे आसपास, सतिंदर गिल ने चुप्पी चुप्पी कोई कमजोरी नहीं
ना ही है ये कोई मजबूरी, और शहला जावेद ने यादों को झाड़ना-पोंछना था झाड़ पोंछकर नया बनाना था कई दिनों से मन में एक सोच थी जाने कैसे मन में खिंची एक खरोंच थी, जैसी सारगर्भित कविताओं के साथ समा बांधा।
गोष्ठी के दूसरे सत्र में डॉ अशोक वढेरा ने अपनी संजीदा कहानी “बचनी मासी” का बढ़िया पाठ किया। डॉ दलजीत कौर ने व्यंग्यात्मक लघु कथा “एक और दो” पढ़ी। आर के सुखन ने “आज्ञा हो तो” नाम की सुंदर कहानी पढ़ी। रेखा मित्तल ने कहानी “विश्वास” का पाठ किया। अभिव्यक्ति साहित्यिक गोष्ठियों का एक ऐसा मंच है जहाँ अनुभवी और नवोदित कवि एक साथ बैठते हैं। यहाँ पुरानी परंपराओं का सम्मान होता है और नए प्रयोगों को स्वीकार किया जाता है। इससे भाषा की शुद्धता और काव्य शैली और लघु कथा शैली की बारीकियों का संरक्षण होता है। गोष्ठी में शीनू वालिया, मीना सूद, सत्येंद्र कुमार सिंह, राजिंदर सराओ, आराधना ओझा और प्रेम ओझा ने भी भाग लिया।
भवदीय, विजय कपूर, अध्यक्ष
अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था, चंडीगढ़।
9217989809

