Chandigarh (sursaanjh.com Bureau), 8 July:
अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था ने सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के सहयोग से कवियित्री सतिंदर गिल के पहले काव्य-संग्रह “जीवन मंथन” पर किया विमोचन
अभिव्यक्ति साहित्यिक संस्था ने सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी के सहयोग से कवियित्री सतिंदर गिल के पहले काव्य-संग्रह “जीवन मंथन” के विमोचन का आयोजन लाइब्रेरी के सभागार में अनेक साहित्यकारों की उपस्थिति में किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष थे जाने माने साहित्यकार और रंगकर्मी डॉक्टर कैलाश आहलूवालिया। मुख्य अतिथि के रूप में संदीप विग ने शिरकत की। हिंदी की 53 कविताओं की इस पुस्तक पर विजय कपूर, बलवंत तक्षक, अन्नुरानी शर्मा, जसप्रीत कौर और अश्वनी भीम ने अपनी समालोचनाएं पढ़ीं।


विजय कपूर ने अपनी समालोचना में कहा, “जीवन मंथन, एक ऐसी यात्रा की परिणीति है जिसमें जीवन को समझने की छटपटाहट है।रूढ़ियों को ललकारने का काव्यात्मक जज़्बा लिए है यह काव्य संग्रह।”
बलवंत तक्षक ने अपनी समीक्षा में कहा, “कवियत्री आस पास बिखरी बारीकियों को खूबसूरती से अपनी कविताओं में पिरोने की क्षमता रखती हैं।” अन्नुरानी शर्मा ने अपना पर्चा पढ़ते हुए कहा, “स्त्री विमर्श के धरातल पर उठते सवालों को भावनात्मक दृष्टि से देखता है काव्य संग्रह ‘जीवन मंथन’।”
डॉक्टर जसप्रीत कौर ने पुस्तक पर अपने विचार सांझा करते हुए कहा, “यह संग्रह हृदय से निकले सुंदर भावों से सुसज्जित है।”
अश्वनी भीम ने अपनी टिप्पणी में कहा, “लेखिका ने अपनी कविताओं में मन के भावों को बांधने का प्रयास किया है। कविताओं में जीवन, समाज और बहुधा स्त्रियों की बात हुई है।”
लेखिका सतिंदर गिल ने अपनी बात रखते हुए कहा, “इस काव्य संग्रह की सभी कविताएं मनुष्य के वास्तविक जीवनानुभव से प्रेरित हैं, जिन्हें मैंने जीवन मंथन के रूप में प्रस्तुत किया है।” मुख्य अतिथि संदीप विग ने कहा, “कवि हृदय की भावाव्यक्ति के अनेक रूप मैने इस संग्रह में देखे।”
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉक्टर कैलाश आहलूवालिया ने अपने वक्तव्य में कहा, “कवि अपनी भावाव्यक्ति में उत्कृष्टता की तलाश करता है। ऐसी एक अभिव्यक्ति जो मौलिक हो और उसकी अपनी हो।यदि हम इस बात को माने तो सतिंदर की लेखन शैली में जो सुरुचिपूर्ण एकरूपता,खुलापन और प्रौढ़ चिंतन है वह एक दम स्वाभाविक मौलिक और सराहनीय है।” कार्यक्रम में लाइब्रेरियन डॉक्टर नीज़ा सिंह भी शामिल हुईं और उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

