Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 10 November:
उठो!उठो मनुष्य/ सत्यवती आचार्य
उठो!उठो मनुष्य!
उठो! उठो मनुष्य!
उठो मनुष्य और
जाग जाओ तुम l
कब तक रहोगे
यूँ सुषुप्त?
गहरी, गाढी नींद में,
तंद्रा को तोड़ो और
जाग जाओ तुमl
झकझोर कर ज़मीर को,


अनभिज्ञता हटाओ,
अधर्म का करो
झट विनाश तुम!
मानव का धर्म क्या है,
तुम यह सीख कर सिखाओ सबको,
धार प्रेम की धरा पे लाओ तुम l
अंतर के नयन खोल कर,
विवेक दृष्टि डालकर,
करो न देर
होश में आ जाओ तुम l
समय वह आ गया है अब,
इसे नहीं गँवाओ तुम,
देर तुम करो नहीं,
उठो! बढ़ो!
प्रहरी बनो अब देश के,
बचाओ लाज माँ की अब
बीड़ा उठाओ, जागो!
मन में ठान लो l
दिग्भ्रमित को,मार्ग पर,
ले कर आओ प्रेम से,
मनुष्यता के धर्म को पूरा करो l
अहम् को त्याग,
होश में संज्ञान ले के, जोश में,
मातृभूमि को बचाओ,
आगे बढ़!
उठो!उठो मनुष्य!
उठो! उठो मनुष्य!
उठो मनुष्य और जाग जाओ तुम l
जाग जाओ तुम
जाग जाओ तुम
—
सत्यवती आचार्य चंडीगढ़

