सावन की फुहारें दिल को भिगोने लगीं/ सत्यवती आचार्य, चंडीगढ़
सावन की फुहारें दिल को भिगोने लगीं/ सत्यवती आचार्य, चंडीगढ़ श्रुति ने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया। वह अमन से प्यार करती थी। अमन भी उस पर जान छिड़कता था। माता-पिता ने उसकी शादी रोहन के साथ तय कर दी थी। यह उनकी दिली तमन्ना थी। …