ओ रंगरेज़/ सत्यवती आचार्य
Chandigarh (sursaanjh.com bueau), 24 March: ओ रंगरेज़/ सत्यवती आचार्य मैं आई हूँ द्वार तुम्हारे लेके चुनरिया धानी, ऐसा प्यारा रंग चढ़ा दे लगूँ मैं जिसमें रानी l नैन हमारे पिय के नीले तुम नीला रंग रंगना, लट उनके घुँघराले हैं तुम लटकन वैसी रखना l चाँद सितारों जैसा है उनके चेहरे पर तेज़, तुम चूनर में…