Chandigarh (sursaanjh.com bureau), 11 July:
चंडीगढ़ की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था अभिव्यक्ति के तत्वावधान में डॉ. निर्मल सूद के काव्य-संग्रह “स्त्री की हंसी” का भव्य विमोचन


चंडीगढ़ की सबसे पुरानी साहित्यिक संस्था अभिव्यक्ति द्वारा शहर के हयात सेंट्रिक, सेक्टर 17 में डॉ. निर्मल सूद के नवीनतम काव्य-संग्रह “स्त्री की हंसी” का विमोचन समारोह आयोजित किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम का संचालन संस्था के अध्यक्ष, वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी विजय कपूर ने किया। डॉ. विमल कालिया विमल, विजय कपूर, डॉ. मीता वशिष्ठ और डॉ. संगम वर्मा और नीरजा मेहता कमलिनी के करकमलों द्वारा पुस्तक का विमोचन हुआ। इस अवसर पर ट्राइसिटी, दिल्ली सहित देश के अन्य शहरों से आए प्रख्यात साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सृजन के बारे में लेखिका डॉ. निर्मल सूद ने अपनी पुस्तक “स्त्री की हंसी” के विमोचन पर अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा, “मेरा काव्य-संग्रह स्त्री की हँसी मेरी साहित्यिक यात्रा का तीसरा पड़ाव है। किसी भी सफ़र का आरंभ करने के लिए पहला कदम उठाना पड़ता है, बिना चले मंज़िल तक पहुँचना मुमकिन नहीं होता। परिस्थितियाँ कैसी भी हों, हमें हर हाल में कर्मशील रहना पड़ता है, पर यह समझ समय की धारा में बहते-बहते ही आती है। मन में संवेदनाओं व भावों का प्रचण्ड प्रवाह जब अंतर में नहीं समाता, तो कवि हृदय सृजन करने पर विवश हो जाता है। फिर होता है कविता का जन्म। ऐसे ही अपने मन, समाज व आसपास से प्रभावित होकर संवेदनशील हृदय सत्य को कल्पना के रंगों में भिगोकर व्यक्त कर देता है। ऐसे ही भावों से ओत-प्रोत है मेरा काव्य-संग्रह, स्त्री की हँसी।”
साहित्यकारों द्वारा पुस्तक समीक्षा कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विशिष्ट साहित्यकारों ने पुस्तक पर गहन चर्चा की। वरिष्ठ साहित्यकार एवं रंगकर्मी विजय कपूर ने पुस्तक का विश्लेषण करते हुए कहा, सरल भाषा और गहरे बिम्बों की इन कविताओं का संसार बहुत विशाल है। यह रसोई के धुएँ से लेकर देश की सरहदों और रावण की घृणा से लेकर बेटी के त्याग तक फैला हुआ है। ये कविताएं केवल शब्दों की संरचना नहीं हैं, बल्कि यह जीने की एक कला का बेहतरीन नमूना हैं। डॉ. विमल कालिया विमल ने अपने विश्लेषण में कहा, स्त्री की हंसी लेखिका के जीवन काल की सुंदर काव्यात्मक स्मृतियां हैं, जो स्त्रियों की दशा और दिशा को बारीकी से उकेरती हैं। डॉ. मीता वशिष्ठ ने अपनी टिप्पणी में कहा, स्त्री की हंसी कवयित्री डॉ. निर्मल सूद का एक भावप्रधान काव्य संग्रह है, जिसमें जीवन के अनेक पक्षों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। इस संग्रह की कविताएं मानवीय रिश्तों, प्रकृति, स्मृतियों, स्त्री-अस्मिता, सामाजिक यथार्थ तथा जीवन दर्शन जैसे विविध विषयों को समेटे हुए हैं। कवयित्री ने सरल और आत्मीय भाषा के माध्यम से पाठकों के हृदय को स्पर्श करने का प्रयास किया है। डॉ. संगम वर्मा ने अपनी टिप्पणी में कहा, डॉ. निर्मल सूद की कविताएँ हमारे समय की मानवीय संवेदनाओं का ऐसा रचनात्मक परिदृश्य निर्मित करती हैं, जहाँ स्त्री केवल विमर्श का विषय नहीं, बल्कि जीवन के बहुआयामी अनुभवों की सजीव उपस्थिति बनकर सामने आती है।” कार्यक्रम के दौरान, उभरती कलाकार समीहा गंभीर की पियानो वादन की प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जानी मानी लेखिका नीरजा मेहता कमलिनी दिल्ली से विशेष रूप से इस कार्यक्रम में पधारी।

